कर्जदारों की कर्जदारी देखी हमने,
मुद्दल से ज़्यादा उधारी देखी हमने
हर दोस्त में सौदागरी देखी हमने,
रिश्तों में भी बाज़ारी देखी हमने
वक़्त ने चेहरे बदल डाले सबके,
सूरत वही, पर अदाकारी देखी हमने
फ़ायदे तक साथ रहे सब हमदम,
नुक़सान में बेग़रज़ी देखी हमने
ख़ामोशियाँ अब सवाल बन बैठीं,
हर जवाब में लाचारी देखी हमने
ज़ुल्म भी करते हैं वो हँसते हँसते,
इंसाफ़ में भी सियासतदारी देखी हमने
जिन्हें चाहा था दिल से, वही पराए निकले,
मोहब्बत में भी व्यापारी देखी हमने
हर एक मुस्कान के पीछे दर्द छुपा था,
ख़ुशियों की भी बीमारी देखी हमने
ग़रीब रोता रहा छत की आस में,
अमीरों की दीवार ऊँचाई देखी हमने
अब तो खुद से भी रिश्ता अजनबी लगता है,
आईने में भी दूरी देखी हमने
हमदर्द को अब किसी से क्या गिला रहे,
हर वफ़ा में ग़द्दारी देखी हमने
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